रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को विस्फोट करके सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा सेला सुरंग की मुख्य ट्यूब का रास्ता बनाए जाने की प्रक्रिया की शुरुआत की। 13,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित सेला दर्रा 317 किलोमीटर लंबे बालीपारा-चारद्वार-तवांग (बीसीटी) सड़क पर स्थित है। सेला अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग, पूर्वी कामेंग और तवांग जिलों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इस सुरंग के जरिये तवांग हर मौसम में सड़क संपर्क से जुड़ा रह सकेगा और इससे यात्रा का समय भी कम होगा।

रक्षा मंत्री ने एक कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुरंग निर्माण के चरण का आगाज किया। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन की सराहना की और कहा कि वह विषम मौसम की स्थिति में रिकार्ड ऊंचाई पर सड़कों, पुलों, सुरंगों और हवाई क्षेत्रों का निर्माण कर राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सीमावर्ती बुनियादी संरचना को मजबूत करने के सीमा सड़क संगठन के प्रयासों से सशस्त्र बलों की संचालन तत्परता बढ़ी है। दूर-दराज के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिला है और स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक सुरंग सिर्फ तवांग ही नहीं बल्कि पूरे अरुणाचल प्रदेश के लिए जीवन रेखा साबित होगी। निर्माण कार्य पूरा होने पर डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सुरंग 13,800 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी दो लेन वाली सड़क सुरंगों में से एक होगी। नवीनतम आस्टि्रयाई सुरंग तकनीक के जरिये निर्मित यह अनूठी सुरंग हर मौसम में यात्रा की अनुमति देने वाली बर्फ लाइन से बहुत नीचे है। यानी इस पर बर्फबारी का प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका निर्माण कार्य जून, 2022 में पूरा होने की संभावना है।

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